पीलीभीत: चूल्हे की लकड़ी बीनने पर वनकर्मियों की बर्बरता, 50 हजार की रंगदारी और बंधक बनाकर पूछी जाति ,पीटने का आरोप

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पीलीभीत जिले में वन विभाग के कर्मचारियों की कथित गुंडई और अमानवीय क्रूरता का एक बेहद शर्मनाक मामला सामने आया है। यहां घर का चूल्हा जलाने के लिए सड़क किनारे से चंद सूखी टहनियां बीनना एक गरीब ग्रामीण को इतना भारी पड़ गया कि वनकर्मियों ने उसे न सिर्फ जंगल में बंधक बनाया, बल्कि 50 हजार रुपये की रंगदारी भी मांगी। इस घटना ने विभागीय कार्यप्रणाली और ‘वर्दी के गुरूर’ पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

​क्या है पूरा मामला?

​पूरनपुर थाना क्षेत्र के रम्पुरा निवासी मेराज खां ने माधोटांडा थाने में दी गई लिखित शिकायत में बताया है कि सोमवार शाम वह अपना टुक-टुक लेकर घर लौट रहा था। रास्ते में ‘हल्दी डेंगा’ के पास उसने सड़क किनारे पड़ी कुछ सूखी टहनियां चूल्हे के लिए उठाईं। तभी पीलीभीत टाइगर रिजर्व के बीट वाचर विकास, गोकुल, सतविंदर पाल और भगवान दास वहां आ धमके। मेराज के सफाई देने और लकड़ियां वहीं फेंक देने के बावजूद, वनकर्मियों ने उसे घसीटते हुए जंगल में ले जाकर एक पेड़ से बांध दिया।

​50 हजार की मांग और अमानवीय क्रूरता

​आरोप है कि कर्मचारियों ने मेराज से 50 हजार रुपये की मांग की और कहा कि पैसे न देने पर उसे लकड़ी चोरी के झूठे केस में फंसा देंगे। जब गरीब ग्रामीण ने पैसे देने में असमर्थता जताई, तो चारों ने उसे लाठियों और चमड़े के पट्टों से जानवरों की तरह बेरहमी से पीटा। क्रूरता का आलम यह था कि युवक के प्राइवेट पार्ट पर भी गंभीर चोट के निशान पाए गए हैं। पीड़ित का यह भी आरोप है कि पिटाई के दौरान उसकी जाति पूछकर भी उसे प्रताड़ित किया गया।

​पुलिस कार्रवाई और भाकियू का प्रदर्शन

​शिकायत मिलने के बाद माधोटांडा पुलिस हरकत में आई है और पीड़ित का मेडिकल परीक्षण कराया गया है। थानाध्यक्ष अशोक पाल ने बताया कि मामले की गहन जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई होगी।

​वहीं, इस घटना की जानकारी मिलते ही भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश फैल गया। भाकियू पदाधिकारी मजदूर के समर्थन में थाने पहुंचे और वनकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष नागेंद्र सिंह ने इसे वन विभाग की खुली मनमानी और गुंडई करार दिया। उन्होंने महोफ रेंजर को पद से हटाने की मांग करते हुए कहा कि किसी की जाति पूछकर उसे बंधक बनाना और पीटना एक गंभीर कानूनी अपराध है, इसलिए सभी आरोपियों के खिलाफ तत्काल मुकदमा दर्ज होना चाहिए।

​गरीब मजदूर के साथ हुई इस बर्बरता ने सिस्टम की संवेदनशीलता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अब देखना यह है कि पुलिस इस मामले में वनकर्मियों पर क्या कार्रवाई करती है।

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